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कौन हैं AIIMS की महिला शक्ति? ज‍िनकी काब‍िल‍ियत की मुरीद दुन‍िया, मरीजों…

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आज अंतरराष्‍ट्रीय मह‍िला द‍िवस के मौके पर आइए आपको ले चलते हैं ऑल इंड‍िया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेड‍िकल साइंसेज नई द‍िल्‍ली और म‍िलवाते हैं एम्‍स की मह‍िला शक्‍त‍ि से, ज‍िनके मजबूत कंधों पर न केवल एम्‍स भारत का टॉप अस्‍पताल बना है बल्‍क‍ि दुन‍ियाभर में एम्‍स के इलाज, र‍िसर्च, स्‍टडी और इनोवेशंस की धाक जम चुकी है. एम्‍स अस्‍पताल में करीब 30 से 35 फीसदी मह‍िला मह‍िलाएं कार्यरत हैं, लेक‍िन आज हम आपको यहां ज‍ट‍िल रोगों के व‍िभागों के टॉप पोजीशंस को मजबूती से संभाल रहीं उन मह‍िला डॉक्‍टरों से म‍िलवाने जा रहे हैं, ज‍िनकी काब‍िल‍ियत का डंका पूरी दुन‍िया में बज रहा है.

एम्स नई दिल्ली यानि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अस्पताल भारत का सबसे बेस्ट अस्पताल ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन अस्पताल में से एक है. यहां हर साल 50 लाख से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं. यहां जटिल और गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए सबसे बेहतरीन डॉक्टर, तकनीक और सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इनमें सबसे खास है यहां मौजूद महिला शक्ति-महिला डॉक्टर्स.

एम्स नई दिल्ली यानि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अस्पताल भारत का सबसे बेस्ट अस्पताल ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन अस्पताल में से एक है. यहां हर साल 50 लाख से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं. यहां जटिल और गंभीर बीमारियों का इलाज करने के लिए सबसे बेहतरीन डॉक्टर, तकनीक और सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इनमें सबसे खास है यहां मौजूद महिला शक्ति-महिला डॉक्टर्स, ज‍िनकी काब‍िल‍ियत के आगे पूरा भारत नतमस्‍तक है.

एम्स में आज महिला दिवस के मौके पर आइए आपको एम्स की वीमेन पॉवर से मिलवाते हैं, जो न केवल विभिन्न विभागों की बागडोर संभाल रही हैं बल्कि मरीजों के इलाज, स्टडी एंड वैज्ञानिक रिसर्च, इनोवेशन और मैनेजमेंट सहित सभी व्यवस्थाओं में म‍िसाल कायम कर रही हैं. आइए जानते हैं एम्स की टॉप महिला डॉक्टरों के बारे में...

एम्स में आज महिला दिवस के मौके पर आइए आपको एम्स की वीमेन पॉवर से मिलवाते हैं, जो न केवल विभिन्न विभागों की बागडोर संभाल रही हैं बल्कि मरीजों के इलाज, स्टडी एंड वैज्ञानिक रिसर्च, इनोवेशन और मैनेजमेंट सहित सभी व्यवस्थाओं में म‍िसाल कायम कर रही हैं. आइए जानते हैं एम्स की टॉप महिला डॉक्टरों के बारे में…

डॉ. मंजरी त्रिपाठी: एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की हेड डॉ. मंजरी त्रिपाठी भारत के टॉप न्यूरोलॉजिस्ट में से एक हैं. ये सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ एपिलेप्सी की भी प्रमुख हैं. डॉ. मंजरी को डिमेंशिया,अल्जाइमर्स और मिर्गी जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों के इलाज में महारथ हासिल है. ऑटोइम्यून मिर्गी से लेकर ड्रग रेसिस्टेंट मिर्गी डायग्नोस्टि और सर्जरी की तकनीकें विकसित करने में अहम योगदान है. ब्रेन संबंधी रोगों को समझने के लिए मॉडर्न न्यूरोलॉजी रिसर्च जैसे होल जीनोम सीक्वेंसिंग, एमआरएनए सीक्वेंसिंग, प्रोटियोमिक्स, ईईजी ब्रेन स्टडी का उपयोग करने के साथ ही ब्रेन इमेजिंग, सिंगल न्यूरोन ब्रेन एनालिसिस टेक्नीक डेवलप की हैं. 400 से ज्यादा शोध पत्र, 17000 से ज्यादा साइटेशन के साथ कई प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित हैं.

डॉ. मंजरी त्रिपाठी: एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की हेड डॉ. मंजरी त्रिपाठी भारत के टॉप न्यूरोलॉजिस्ट में से एक हैं. ये सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ एपिलेप्सी की भी प्रमुख हैं. डॉ. मंजरी को डिमेंशिया,अल्जाइमर्स और मिर्गी जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों के इलाज में महारथ हासिल है. ऑटोइम्यून मिर्गी से लेकर ड्रग रेसिस्टेंट मिर्गी डायग्नोस्टि और सर्जरी की तकनीकें विकसित करने में अहम योगदान है. ब्रेन संबंधी रोगों को समझने के लिए मॉडर्न न्यूरोलॉजी रिसर्च जैसे होल जीनोम सीक्वेंसिंग, एमआरएनए सीक्वेंसिंग, प्रोटियोमिक्स, ईईजी ब्रेन स्टडी का उपयोग करने के साथ ही ब्रेन इमेजिंग, सिंगल न्यूरोन ब्रेन एनालिसिस टेक्नीक डेवलप की हैं. 570 से ज्यादा शोध पत्र, 24000 से ज्यादा साइटेशन के साथ कई प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित हैं.

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डॉ. राधिका टंडन: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ नई दिल्ली के आरपी सेंटर की चीफ डॉक्टर राधिका टंडन भारत की टॉप कॉर्निया सर्जन और आई ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट हैं. ये पहली महिला हैं जो आरपी सेंटर की प्रमुख बनी हैं. इनके नेतृत्व में आधुनिक टांका रहित तकनीक से करीब 1 हजार कॉर्निया ट्रांसप्लांट हर साल होते हैं और एम्स स्थित नेशनल आई बैंक की मदद से अभी तक करीब 26 हजार लोगों को उनकी आंखों की रोशनी वापस मिल चुकी है.कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकीं प्रोफेसर राधिका की देखरेख में सिंथेटिक या आर्टिफिशियल कॉर्निया, स्टेम सेल के अलावा बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया पर भी काम चल रहा है.

डॉ. राधिका टंडन: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ नई दिल्ली के आरपी सेंटर की चीफ डॉक्टर राधिका टंडन भारत की टॉप कॉर्निया सर्जन और आई ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट हैं. ये पहली महिला हैं जो आरपी सेंटर की प्रमुख बनी हैं. इनके नेतृत्व में आधुनिक टांका रहित तकनीक से करीब 1 हजार कॉर्निया ट्रांसप्लांट हर साल होते हैं और एम्स स्थित नेशनल आई बैंक की मदद से अभी तक करीब 26 हजार लोगों को उनकी आंखों की रोशनी वापस मिल चुकी है.कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकीं प्रोफेसर राधिका की देखरेख में सिंथेटिक या आर्टिफिशियल कॉर्निया, स्टेम सेल के अलावा बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया पर भी काम चल रहा है.

डॉ. रीमा दादा: एम्स में प्रोफेसर इंचार्ज मीडिया सेल जैसे महत्वपूर्ण पद को संभाल रहीं डॉ. रीमा दादा की उपलब्धियां इससे कहीं आगे हैं. डॉ. दादा 2020 से 2025 तक के दुनिया के उन टॉप 2% चिकित्सा वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिन्होंने रिप्रोडक्टिव मेडिसन पर काम किया है. एनाटमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा ने जेनेटिक और फर्टिलिटी रोगों पर बहुत काम किया है. इन्होंने महिला और पुरुषों में बांझपन, स्पर्म डीएनए डैमेज, गर्भपात, एजिंग और योग, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर का पता लगाने में मददगार जेनेटिक डायग्नोस्टिक सेवाएं डेवलप की हैं. इनके सैकड़ों रिसर्च इंटरनेशनल लेवल पर प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. रीमा दादा: एम्स में प्रोफेसर इंचार्ज मीडिया सेल जैसे महत्वपूर्ण पद को संभाल रहीं डॉ. रीमा दादा की उपलब्धियां इससे कहीं आगे हैं. डॉ. दादा 2020 से 2025 तक के दुनिया के उन टॉप 2% चिकित्सा वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिन्होंने रिप्रोडक्टिव मेडिसन पर काम किया है. एनाटमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा ने जेनेटिक और फर्टिलिटी रोगों पर बहुत काम किया है. इन्होंने महिला और पुरुषों में बांझपन, स्पर्म डीएनए डैमेज, गर्भपात, एजिंग और योग, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर का पता लगाने में मददगार जेनेटिक डायग्नोस्टिक सेवाएं डेवलप की हैं. इनके सैकड़ों रिसर्च इंटरनेशनल लेवल पर प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. उमा कुमार: गठिया (Arthritis), ऑटोइम्यून रोगों और मस्कुलोस्केलेटल बीमारियों के इलाज, रिसर्च और एजुकेशन में काम कर रहीं डॉ. उमा कुमार एम्स नई दिल्ली के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं. डॉ. उमा एम्स में सेवाएं देने के साथ ही कई राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय संगठन जैसे IRA, एशिया पेसिफिक लीग ऑफ एसोसिएशंस फॉर रूमेटोलॉजी में सक्रिय हैं. 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर के साथ कई मेडिकल किताबों में इनके लिखे चैप्टर मेडिकल छात्र पढ़ते हैं. ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए मल्टी डिसिप्लिनरी इलाज मॉडल के साथ स्पेशल कलीनिक शुरू करने वाली डॉ. उमा का रिसर्च क्षेत्र लाइफस्टाइल फैक्टर्स सहित काफी व्यापक है.

डॉ. उमा कुमार: गठिया (Arthritis), ऑटोइम्यून रोगों और मस्कुलोस्केलेटल बीमारियों के इलाज, रिसर्च और एजुकेशन में काम कर रहीं डॉ. उमा कुमार एम्स नई दिल्ली के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं. डॉ. उमा एम्स में सेवाएं देने के साथ ही कई राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय संगठन जैसे IRA, एशिया पेसिफिक लीग ऑफ एसोसिएशंस फॉर रूमेटोलॉजी में सक्रिय हैं. 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर के साथ कई मेडिकल किताबों में इनके लिखे चैप्टर मेडिकल छात्र पढ़ते हैं. ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए मल्टी डिसिप्लिनरी इलाज मॉडल के साथ स्पेशल कलीनिक शुरू करने वाली डॉ. उमा का रिसर्च क्षेत्र लाइफस्टाइल फैक्टर्स सहित काफी व्यापक है.

डॉ. नीना मल्होत्रा:भारत की प्रसिद्ध स्त्री-रोग विशेषज्ञ नीना मल्होत्रा प्रजनन चिकित्सा और आईवीएफ विशेषज्ञ हैं. एम्स में नई दिल्ली के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. नीना इनफर्टिलिटी और और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) पर काफी काम कर चुकी हैं. जहां प्राइवेट आईवीएफ क्लीनिकों का पूरे भारत में बोलबाला है वहां नीना सरकारी तंत्र में इस सुविधा से दंपत्तियों को संतान सुख दे रही हैं. इनके कई रिसर्च जैसे 30 के बाद महिलाओं में अंडाणुओं की क्वालिटी घटना, डोनर एग आईवीएफ और सेल्फ एग आईवीएफ की तुलना, जीटीबी, पीसीओएस आदि बीमारियों के इलाज और रिसर्च में इन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं.

डॉ. नीना मल्होत्रा:भारत की प्रसिद्ध स्त्री-रोग विशेषज्ञ नीना मल्होत्रा प्रजनन चिकित्सा और आईवीएफ विशेषज्ञ हैं. एम्स में नई दिल्ली के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. नीना इनफर्टिलिटी और और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) पर काफी काम कर चुकी हैं. जहां प्राइवेट आईवीएफ क्लीनिकों का पूरे भारत में बोलबाला है वहां नीना सरकारी तंत्र में इस सुविधा से दंपत्तियों को संतान सुख दे रही हैं. इनके कई रिसर्च जैसे 30 के बाद महिलाओं में अंडाणुओं की क्वालिटी घटना, डोनर एग आईवीएफ और सेल्फ एग आईवीएफ की तुलना, जीटीबी, पीसीओएस आदि बीमारियों के इलाज और रिसर्च में इन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं.

डॉ. रितु दुग्गल: एम्स के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च यानि डेंटल अस्पताल की हेड डॉ.रितु दुग्गल जानी-मानी पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री विशेषज्ञ हैं. इनकी हेडशिप में इस बार भी सीडीईआर देश का टॉप डेंटल कॉलेज चुना गया है. आधुनिक और लेटेस्ट तकनीकों से दंत रोगों की पहचान और इलाज करने वाले इस सेंटर में डॉ. रितु ने फ्लोराइड थेरेपी, सीलेंट तकनीक, प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री, ओरल हाईजीन एजुकेशन पर बहुत काम किया है. डॉ. दुग्गल कई डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के अलावा कई संगठनों से जुड़कर सामाजिक स्तर पर भी डेंटल इश्यूज को लेकर जागरुक कर रही हैं.

डॉ. रितु दुग्गल: एम्स के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च यानि डेंटल अस्पताल की हेड डॉ.रितु दुग्गल जानी-मानी पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री विशेषज्ञ हैं. इनकी हेडशिप में इस बार भी सीडीईआर देश का टॉप डेंटल कॉलेज चुना गया है. आधुनिक और लेटेस्ट तकनीकों से दंत रोगों की पहचान और इलाज करने वाले इस सेंटर में डॉ. रितु ने फ्लोराइड थेरेपी, सीलेंट तकनीक, प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री, ओरल हाईजीन एजुकेशन पर बहुत काम किया है. डॉ. दुग्गल कई डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के अलावा कई संगठनों से जुड़कर सामाजिक स्तर पर भी डेंटल इश्यूज को लेकर जागरुक कर रही हैं.

डॉ. निरुपम मदान: मूल रूप से बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) और नवजात शिशु चिकित्सा (Neonatology) की विशेषज्ञ डॉ. निरुपम मदान एम्स में मेडिकल सु्प्रिटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं.डॉ. मदान ने शिशु रोगों, बाल मृत्यु दर में कमी के लिए रिसर्च-शोध और इलाज के स्तर पर प्रयासों के साथ ही अपने अनुभव से अस्पताल में आईसीयू, क्लिनिकल सेवाओं, प्रबंधन और इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत किया है. एम्स में हर साल इलाज के लिए 50 लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं. मरीजों के इतने दवाब के बावजूद भी इसे सबसे व्यवस्थित सरकारी अस्पतालों में से एक माना जाता है. इनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रीमैच्योर बर्थ, नियोनेटल इन्फेक्शन, एनआईसीयू मैनेजमेंट पर काफी शोध प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. निरुपम मदान: मूल रूप से बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) और नवजात शिशु चिकित्सा (Neonatology) की विशेषज्ञ डॉ. निरुपम मदान एम्स में मेडिकल सु्प्रिटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं.डॉ. मदान ने शिशु रोगों, बाल मृत्यु दर में कमी के लिए रिसर्च-शोध और इलाज के स्तर पर प्रयासों के साथ ही अपने अनुभव से अस्पताल में आईसीयू, क्लिनिकल सेवाओं, प्रबंधन और इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत किया है. एम्स में हर साल इलाज के लिए 50 लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं. मरीजों के इतने दवाब के बावजूद भी इसे सबसे व्यवस्थित सरकारी अस्पतालों में से एक माना जाता है. इनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रीमैच्योर बर्थ, नियोनेटल इन्फेक्शन, एनआईसीयू मैनेजमेंट पर काफी शोध प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. तूलिका सेठ: भारत की टॉप हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. तूलिका सेठ एम्स नई दिल्ली में हेमेटोलॉजी विभाग में वरिष्ठ फैकल्टी में शामिल हैं. रक्त संबंधी बीमारियों जैसे ब्लड कैंसर, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, ल्यूकेमिया, एनीमिया आदि के इलाज में बेहतरीन योगदान देने वाली डॉ. सेठ के नेतृत्व में बोन मेरो ट्रांसप्लांट के अलावा आधुनिक लैब तकनीकें जैसे रियल टाइम पीसीआर, फ्लो साइटोमेट्री, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, जेनेटिक म्यूटेशन एनालिसिस आदि मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की गई हैं. हीमोफीलिया ए और बी पर इनके कई अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. तूलिका सेठ: भारत की टॉप हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. तूलिका सेठ एम्स नई दिल्ली में हेमेटोलॉजी विभाग में वरिष्ठ फैकल्टी में शामिल हैं. रक्त संबंधी बीमारियों जैसे ब्लड कैंसर, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, ल्यूकेमिया, एनीमिया आदि के इलाज में बेहतरीन योगदान देने वाली डॉ. सेठ के नेतृत्व में बोन मेरो ट्रांसप्लांट के अलावा आधुनिक लैब तकनीकें जैसे रियल टाइम पीसीआर, फ्लो साइटोमेट्री, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, जेनेटिक म्यूटेशन एनालिसिस आदि मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की गई हैं. हीमोफीलिया ए और बी पर इनके कई अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशित हुए हैं.

डॉ. शिवांगी साहा: एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवांगी साहा प्लास्टिक रीकंस्ट्रिक सर्जरी, बर्न मैनेजमेंट और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की विशेषज्ञ हैं. फिलहाल ये एम्स में पहली बार शुरू किए जा रहे फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम में अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं, जो एसिड या बर्न केसेज में चेहरा गंवा चुके मरीजों के लिए वरदान होगा. डॉ. शिवांगी साहा माइक्रोसर्जरी में एक्सपर्ट हैं जिसमें मरीज की नसें और रक्त वाहिकाएं भी आपस में जोड़ी जाती हैं और शरीर के एक हिस्से की मांसपेशियां दूसरे हिस्से में ट्रांसफर की जाती हैं. बर्न के जटिल ऑपरेशनों को संभालने वाली शिवांगी मरीजों की उम्मीद हैं.

डॉ. शिवांगी साहा: एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवांगी साहा प्लास्टिक रीकंस्ट्रिक सर्जरी, बर्न मैनेजमेंट और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की विशेषज्ञ हैं. फिलहाल ये एम्स में पहली बार शुरू किए जा रहे फेस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम में अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं, जो एसिड या बर्न केसेज में चेहरा गंवा चुके मरीजों के लिए वरदान होगा. डॉ. शिवांगी साहा माइक्रोसर्जरी में एक्सपर्ट हैं जिसमें मरीज की नसें और रक्त वाहिकाएं भी आपस में जोड़ी जाती हैं और शरीर के एक हिस्से की मांसपेशियां दूसरे हिस्से में ट्रांसफर की जाती हैं. बर्न के जटिल ऑपरेशनों को संभालने वाली शिवांगी मरीजों की उम्मीद हैं.



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